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Tuesday, January 20, 2015

उम्मीद

दिन के
सारे दर्द
वो पी गया
इस उम्मीद में कि
रात का चाँद
हाेगा शायद
बहुत खूबसूरत
और रात के दर्द
इस उम्मीद में कि
अगले दिन होगी
ईक नई सुबह
ये उम्मीद है तो
ये जिन्दगी है
और जिन्दगी से
खूबसूरत
शायद कुछ भी नहीं ....

7 comments:

  1. सच में कुछ भी नहीं ... जिन्दफ्गी है तो रंग हैं .. नज़ारे हैं खूबसूरती है ...

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  2. जीवन इसी दुष्चक्र का नाम है उपेन भाई!! बहुत ख़ूब कहा है आपने!

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  3. सच कहती पंक्तियाँ .

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  4. Nice blog !! http://packers-and-movers-bangalore.in/

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