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Monday, December 13, 2010

हम सबके नाम एक शहीद की कविता

Chitra Google Sabhar

संसद हमले की 9 वीँ बरसी पर उन शहीदोँ को नमन और एक कविता उन्हीँ एक शहीद की जुबानी हम सबके लिये :-

माँ !
देश ने भले खोया हो
एक बहादुर सिपाही
मगर तुमने तो खोया
सिपाही के साथ
एक बेटा भी
एक माँ का दर्द बेटे से अच्छा
शायद ही कोई जाने
जिन लोगों ने
भारत माँ को दुत्कारा
वो किसी दूसरे के माँ के आँसू
क्या पोंछेगे ?

पत्नी !
मैँ अपराधी हूँ
तुम्हारें माथे का
सुहाग छिनकर
हाँ गर्व जरूर हुआ होता
जब मेरे जाने के बाद
तुम्हारे आँखोँ का आँसू
पोछने के लिये
एक अरब हिन्दुस्तानियोँ मेँ सेँ
एक हाथ भी उठा होता।

बेटा !
कब तक देखोगे
मेरे शहादत पर
घोषित फ्लैट का रास्ता
क्योँकि अब उसमेँ कोई
और काबिज है
राहत पैकेज
जो तुम तक पहुँचते पहुँचते
आधे से भी कम रह जायेगी
हमदर्दी
जिसकी जरूरत
मेरे ख्याल से
एक शहीद के बेटे को
Chitra Google Sabhar
नहीँ पड़नी चाहिये
इसलिये अब उठो
अपने पैर पर खड़े होवो
और बिना किसी आसरे के
दुनिया को दिखलाओ
कि मैँ एक बहादुर शहीद का बेटा हूँ ।

और अन्त मेँ
मेरे प्यारे देशवाशियोँ !
शहीद के मरने के बाद
उसकी शहादत को
जिन्दा रखना सीखो
न कि सिर्फ फूल- मालायें चढ़ाकर
अपने कर्तव्यों की  इतिश्री 
और मरने के बाद हमें
हमेशा के लिये मार देना ।
' जयहिंद '

51 comments:

  1. बहुत सुंदर..... हृदयस्पर्शी रचना .....
    आखिरी पंक्तियाँ आँखें नम कर गयीं.....

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  2. उफ़, उपेन्द्र जी, झंझ्कोर के रख दिया आपने....

    शहीद के मरने के बाद उनकी शहादत वास्तव में याद रखनी चाहिए...... यही सच्ची श्रधांजलि है...........

    प्रणाम शहीदां नू.....

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  3. bahut badhiya rachana .. sansad hamale men shaheedo ko naman

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  4. bahut hi sundar....
    शहीदों को नमन...काश हम उनके बलिदान को समझ पाते...

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  5. पोस्ट अच्छी लगी
    "शहीदों के मरने बाद उनकी शहादत को जिन्दा रखना सीखो ऐ देशवासियों" अजी यहाँ तो जीते जी मारने को तत्पर बैठे हैं मरने के बाद किसने देखा है. भ्रष्टाचार अपने चरम पर है, जो ऊपर जाता है उसे नीचे तो आना ही है पर कब .......शहीदों को नमन

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  6. नमन है उन शहीदों को जो अपनी जान पर खेलते हैं ... मार्मिक रचना है आपकी .. पर कितनी सच्ची ...

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  7. मर्मस्पर्शी रचना .शहीदों को सच्ची श्रीन्धांजलि दी है आपने.

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  8. पाठकों के मन को झिंझोड देने वाली मर्मस्पर्शी रचना । बेमिसाल...

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  9. बहुत मर्मस्पर्शी ...चेतना जागृत करती हुई ....सच्ची श्रद्धांजली ...

    मन को छूने वाली रचना ...

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  10. आपका ब्लॉग बहुत पसंद आया है ! बहुत सच्ची बातें कहीं हैं

    उपेन्द्र जी आपको सलाम दिल से

    आपका हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  11. मर्म स्थल को स्पर्श करने वाली कविता...
    भारत माता के वीर शहीदों को नमन...।

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  12. हमें फिर भी शर्म नहीं आती...

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  13. marmsaprshi rachna...desh ke khatir mar mitne wale sahidon ko naman...

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  14. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 14 -12 -2010
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  15. आदरणीय उपेन्द्र जी
    नमस्कार !
    नमन है उन शहीदों को जो अपनी जान पर खेलते हैं

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  16. बहुत सुन्दरता से आप्ने अपने उद्गार निकाल कर हमारे आत्मकेंद्रित सोच को झकझोरा है!

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  17. याद रखो क़ुरबानी .....शहीदों को नमन

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  18. @संगीता जी
    इस कविता को यह सम्मान देने के लिए आभार. मै यहाँ ये बताना चाहूँगा की आज संसद के बरसी की खबर सुबह -सुबह मुझे शिवम् जी के ब्लॉग पर मिली. मगर समय न होने के वजह से ये पूरी कविता ऑफिस के टी- ब्रेक में १५ मिनट में लिखकर वहीं मोबाइल पर टाइप करके पोस्ट की गयी है . बाद में घर आने पर इसमें दो चित्र और जोड़े गयें......... ऐसे में आप द्वारा इस कविता को ये सम्मान, इस कविता और मेरी एक छोटी सी कोशिस के लिए किसी आवार्ड से कम नहीं. बहुत बहुत धन्यवाद.

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  19. सोचने को मजबुर करती है कि आखिर कबतक हम अपने जमीर को मारकर जिंदा रहेगें। सुन्दर रचना।

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  20. उपेन्द्र जी!
    पहली बार किसी ने एक सिपाही को मात्र सिपाही नहीं, एक बेटा और पति बताया है... मन भर आया! और यही सच्ची श्रद्धांजलि है उनके लिए!!

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  21. अपनी जान पर खेल कर देश की हिफ़ाज़त करने वाले शहीदों को नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।

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  22. जो मरे कोई "नेता" तो रोते है हजारो,
    झुकते है "झंडे" और "सिर" भी |



    न होती कोई आँख नम,
    न पड़ता फर्क किसी को,



    जवान बेटे , भाई होते शहीद ,
    जब जब गिरते 'मिग' मेरे देश में ..... |



    रोता है दिल ,रोता हूँ मैं भी ....
    क्यों है "शहादत" के यह हाल मेरे देश में ...??



    घर घर शहीद की बेवा,
    क्यों मांजती है थाल मेरे देश में .....??



    नहीं है कोई बैर नेताओ से मुझ को,
    न मैं कहेता कि "जाए" कोई भी 'एसे',



    रहेगा "गणतंत्र" तो रहेगे नेता भी,
    है दुनिया का सब से बड़ा प्रजातंत्र मेरे देश में ...|



    बस चाहता हूँ इतना .....,
    कि मिले शहीदों को मान मेरे देश में ....||





    फ़िर कहेता हूँ यारो याद रखना ......

    बस इतना याद रहे ....एक साथी और भी था ||

    संसद हमले के अमर शहीदों को पूरे हिंदी ब्लॉग जगत और सभी मैनपुरी वासीयों की ओर से शत शत नमन !

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  23. उपेन्द्र जी,
    नमन ऐसे शहीदों को और सलाम आपकी कलम को।

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  24. हृदयस्पर्शी रचना !
    बिल्कुल यही भावनाएं होती होंगी उस पुण्यात्मा की जो भारत मां पर अपना सर्वस्व बलिदान कर चिर निद्रा में सो गया
    लेकिन हमें क्या फ़र्क़ पड़ता है,फ़र्क़ तो उसे पड़ता है जिस ने अपना जवान बेटा खोया हो ,फ़र्क़ सैनिक की उस विधवा को पड़ता है जो असहाय सी अपने बच्चों के लालन पालन की चिंता में हो ,मुझे अपना एक शेर याद आता है
    वो बेव ए शहीद है महरूम, हक़ से भी
    उस की मदद को कोई एदारा न आएगा (एदारा =ऑर्गनाइज़ेशन)

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  25. बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति.........मेरा ब्लाग"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ जिस पर हर गुरुवार को रचना प्रकाशित साथ ही मेरी कविता हर सोमवार और शुक्रवार "हिन्दी साहित्य मंच" at www.hindisahityamanch.com पर प्रकाशित..........आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे..धन्यवाद

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  26. बेहद मर्मस्पर्शी झकझोर देने वाली रचना …………अन्तिम पंक्तियाँ सोचने को विवश करती हैं।

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  27. marmsparshi rachna k liye aapko bahut bahut badhai..........man ko chu gayi aapki ye rachna

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  28. शहीदों के नाम बेहतरीन प्रस्तुति ।
    नमन ।

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  29. शिवम् जी आपका हार्दिक आभार , आपकी कविता काफी बेहतरीन है. बहुत सही कहा आपने . सच्चा नमन तो तब होगा जब शहीदों को उनका सम्मान मिले ....

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  30. शहीदों को अश्रपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ आपको बहुत बहुत धन्यवाद एवम शुभकामनाएं इतनी सुंदर एवं मार्मिक रचना हेतु।

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  31. bohot bohot khoob.....bade hi khoobsurat andaaz se aapne ek shaheed, ek bete, pati aur pita ki vyatha ko shabd diye hain...great job...!!!

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  32. अंदर तक झकझोर देनेवाली बहुत ह्रदयस्पर्शी रचना..

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  33. अच्‍छी कविता। इस देश के हालात पर अब क्‍या कहें?

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  34. जज्बातों को सुन्दर शब्दों में ढाला....नमन.

    'सप्तरंगी प्रेम' के लिए आपकी प्रेम आधारित रचनाओं का स्वागत है.
    hindi.literature@yahoo.com पर मेल कर सकते हैं.

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  35. शहीदों के बलिदान को नमन के रूप में
    पावन भावनाओं से लिखी गयी
    श्रद्धांजली ........
    एक बहुत अच्छी ,
    मार्मिक कविता .

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  36. ओह ...अतिमर्मिक !!!!

    काश कि तंत्र और जन जन के ह्रदय तक यह संवेदना पहुँच पाती...

    सार्थक रचना...

    आभार आपका..

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  37. बहुत भावपूर्ण रचना |बधाई | आपका मेरे ब्लॉग पर आने और प्रोत्साहित करने के लिए आभार
    आशा

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  38. उपेन्द्र जी,
    मर्म स्थल को स्पर्श करने वाली कविता...
    भारत माता के वीर शहीदों को नमन....और आपकी कलम को सलाम..

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  39. man ko jhakjhorati hi ek bhavpurn avambehatreen prastuti. sachhe saputo ke man kibaat bahut hi khoobsurati ke saath vykt kiya hia aapne. kash aisa sabhi sochate.
    poonam

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  40. उपेन्‍द्र जी, दिल भर आया। इस सार्थक रचना के लिए बधाई स्‍वीकारें।

    ---------
    प्रेत साधने वाले।
    रेसट्रेक मेमोरी रखना चाहेंगे क्‍या?

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  41. बहुत भावपूर्ण रचना |बधाई |

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  42. bahut bhawanaapoorn rachanaa .. kaash ye hmare netaa samaza paate . aur kabhee hamare saheedon ko sachchhe sraddhanjali hee de paate

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  43. ताऊ पहेली १०५ का सही जवाब :
    http://chorikablog.blogspot.com/2010/12/105.html

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  44. बहुत सुंदर, हृदयस्पर्शी रचना ... भारत माता के वीर शहीदों को नमन !

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  45. हमारी स्मृतियों का इस क़दर धुंधलाते जाना न जाने हमें कहां ला के पटकेगा!

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